Wednesday, September 5, 2012

Dainik Ibadat

Today DAINIK IBADAT 5-9-2012


Friday, April 6, 2012

9 अप्रैल को भारत लौटेंगे युवराज सिंह



लंदन: भारतीय क्रिकेटर युवराज सिंह के फैंस के लिए अच्छी खबर है। युवराज 9 अप्रैल को भारत वापस लौट रहे हैं।  युवराज सिंह स्वदेश लौटने के बाद 11 अप्रैल को प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे। युवराज के कैंसर का अमेरिका के टेक्सास में कई महीनों तक इलाज चला। उन्हें 18 मार्च को कैमोथेरापी के तीन स्तरों से गुजरने के बाद अस्पताल से डिस्चार्ज किया गया था।

युवराज सिंह इन दिनों लंदन में अपने मित्र के फ्लैट पर रह रहे हैं। पिछले दिनों सचिन ने उनसे वहीं मुलाकात की थी।

फरवरी से अमेरिका में इलाज करवाने वाले युवराज के मई-जून तक मैदान पर उतरने की संभावना है। उपचार के दौरान उनके बाल निकल गये थे। युवराज पिछले साल नवंबर में वेस्टइंडीज के खिलाफ तीन टेस्ट मैचों की श्रृंखला में से दो मैच खेलने के बाद प्रतिस्पर्द्धी क्रिकेट में नहीं खेले हैं।

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 2000 में पदार्पण करने वाले युवराज 274 वनडे में 8051 और 37 टेस्ट में 1775 रन बना चुके हैं। वह पिछले साल विश्व कप में मैन आफ द टूर्नामेंट रहे थे । उन्होंने नौ मैचों में 362 रन बनाने के अलावा 15 विकेट भी चटकाये थे।

रक्षा खामियों के बारे में कैग ने भी चेताया था



नई दिल्ली: इस समय जब हमारे नेता सेनाध्यक्ष विजय कुमार सिंह को देश की रक्षा तैयारी में खामियों को मीडिया में सार्वजनिक करने के आरोप लगा रहे है, वो उस समय खामोश क्यों थे जब सीएजी यानी कैग ने आर्मी चीफ से बहुत पहले ही देश की रक्षा खामियों को उजागर किया था।

एक दैनिक अखबार में शुक्रवार को छपी खबर के अनुसार सीएजी ने पिछले साल दिसंबर में ही देश की मौजूदा रक्षा तैयारियों में कमी के बारे में आर्मी चीफ के पत्र से भी ज्यादा गंभीर चिंता जताई थी। गौरतलब है कि 12 मार्च 2012 को सेनाध्यक्ष वीके सिंह ने प्रधानमंत्री कार्यालय को एक चिट्ठी लिखकर देश की मौजूदा सुरक्षा खामियों के बारे में अवगत कराया था।

इससे भी ज्यादा आश्चर्य की बात यह है कि जो नेता उस समय साएजी की रिपोर्ट के बारे में न कुछ बोल रहे थे और न ही इस संबंध में कोई जानकारी जुटा पाए थे वो ही आज सबसे ज्यादा आर्मी चीफ पर शब्दों के वार कर रहे हैं, और उनको हटाने तक की बात कर रहे हैं।

अखबार के मुताबिक, कैग ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि सेना के पास अत्याधुनिक हथियारों की कमी है। देश की रक्षा पंक्ति में लगे कुछ हथगोले और गोला बारूद तो द्वितीय विश्व युद्ध के समय के हैं। इसकी तकनीक भी 1970 के दशक की है, दूसरे शब्दों में हमारी सुरक्षी तकनीक समय के हिसाब से पुरानी हो चुकी है।

Wednesday, April 4, 2012

सेना के ‘मूवमेंट’ पर बवाल


 


नई दिल्ली. आर्मी चीफ जनरल वीके सिंह के उम्र विवाद के दौरान सेना की दो टुकड़ियों के मूवमेंट को लेकर बवाल खड़ा हो गया है। एक अखबार में छपी खबर के मुताबिक 16-17 जनवरी की रात ये टुकड़ियां राजधानी नई दिल्ली की तरफ बढ़ रही थीं। पीएम मनमोहन सिंह और रक्षा मंत्री ए के एंटनी ने अखबार में छपी इस खबर को पूरी तरह बेबुनियाद बताया है। उन्‍होंने कहा कि भारतीय सेना पर सवाल उठाने का कोई आधार ही नहीं है। रक्षा मामलों के विशेषज्ञ भी इस खबर पर सवाल उठा रहे हैं लेकिन बीजेपी ने इस मुद्दे को हवा दे दिया है।


मनमोहन सिंह ने कहा कि यह रिपोर्ट 'बेवजह चिंता पैदा करने वाली' है और इसे महत्व नहीं दिया जाना चाहिए। सिंह ने यहां एक कार्यक्रम के दौरान संवाददाताओं से कहा, "ये बेजह रपट बेवजह चिंता उत्पन्न करने वाली है। इन रपटों को महत्व नहीं दिया जाना चाहिए।"
सिंह ने सरकार का रुख साफ करते हुए कहा कि सेना प्रमुख का पद एक गौरवशाली पद है और हम सभी का यह दायित्व है कि ऐसा कुछ न करें जिससे उसकी गरिमा को ठेस पहुंचे।
 क्‍या छपा है अखबार में?
अंग्रेजी अखबार 'इंडियन एक्सप्रेस' ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि हिसार से 33 वीं आर्मर्ड डिवीजन की एक यूनिट दिल्ली आ रही सेना की टुकड़ी बहादुरगढ़ के इंडस्ट्रियल पार्क तक पहुंच गई थी, जबकि आगरा से 50 पैरा ब्रिगेड की टुकड़ी पालम पहुंच चुकी थी। लेकिन दोनों को वहीं रोककर वापस भेज दिया गया था। ये दोनों टुकड़ियां बिना किसी इजाजत के दिल्ली के पास आ गई थीं। नियमों के मुताबिक राजधानी के आसपास सेना की हलचल के बारे में सरकार को पहले से ही जानकारी देनी होती है।

बताया जा रा है कि 33 वीं आर्मर्ड डिवीजन की इस यूनिट में करीब 48 हथियारबंद गाड़ियां शामिल थीं। जब इस बात की सूचना रक्षा मंत्रालय को मिली तो डीजीएमओ लेफ्टिनेंट जनरल एके चौधरी को तलब किया गया। लेफ्टिनेंट जनरल एके चौधरी से दोनों टुकड़ियों को वापस भेजने को कहा गया था। अखबार के मुताबिक लेफ्टिनेंट जनरल एके चौधरी ने रक्षा मंत्रालय से कहा था कि यह रूटीन अभ्यास है, जहां सेना कोहरे में मूवमेंट का अभ्यास कर रही थी।

ऐसी खबर है कि जिस वक्‍त सेना का यह ‘मूवमेंट’ हुआ, उस वक्‍त रक्षा सचिव एस के शर्मा मलेशिया दौरे पर थे लेकिन सरकार ने उन्‍हें तुरंत तलब किया। इसके बाद शर्मा रात में दिल्‍ली पहुंचे और सीधे अपने दफ्तर गए।

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सेना की दो टुकड़ियों के मूवमेंट की जानकारी 17 जनवरी की सुबह प्रधानमंत्री को पूरे मामले की जानकारी दी गई थी। उत्तर पश्चिम क्षेत्र में सेना की मूवमेंट के बारे में जानकारी ली गई और पाया गया कि कुछ भी असामान्य नहीं है।

दो टुकड़ियों के मूवमेंट की सेना के अतिरिक्त महानिदेशक (जन सूचना) मेजर जनरल एसएल नरसिंहन ने पुष्टि की है। लेकिन उन्होंने कहा है कि यह रूटीन एक्सरसाइज थी। रक्षा विशेषज्ञ कर्नल (रिटायर्ड) यूके राठौड़ मानते हैं कि यह दोनों टुकड़ियां बहुत छोटी थीं, इसलिए पहले से जानकारी देने की जरूरत नहीं है।


लेकिन रक्षा सचिव शशिकांत शर्मा ने इस मामले को उम्र विवाद से जोड़ने को ग़लत बताया है। शर्मा ने एक निजी टीवी चैनल ने एक निजी टीवी चैनल से कहा है कि सेना की टुकड़ियों का मूवमेंट गलत नहीं था।  गौरतलब है कि 16 जनवरी को ही थल सेनाध्यक्ष वीके सिंह ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

जून, 1984 में ऑपरेशन ब्लूस्टार के मद्देनज़र सेना की सिख यूनिटों के कुछ सिख दिल्ली की तरफ बढ़े थे। इसी को देखते हुए राजधानी में सेना की टुकड़ियों के मूवमेंट के लिए पहले से ही जानकारी देने का प्रोटोकॉल बनाया गया था।
सेना की सफाई
-दोनों टुकड़ियों को कोहरे में मूवमेंट का अभ्यास कराया जा रहा था।
-सेना का मूवमेंट दिल्ली की तरफ था, न कि पाकिस्तान सीमा की तरफ कि इसकी जानकारी दी जाए।
कुछ अहम सवाल
-रक्षा मंत्रालय को पहले से जानकारी क्यों नहीं दी गई?
-क्या इन यूनिटों को दिल्ली के इतने नजदीक तक आना था?
-इस मूवमेंट की जानकारी भारतीय वायुसेना को क्यों नहीं दी गई?

33 वीं आर्मर्ड डिवीजन (हिसार) 33 वीं आर्मर्ड डिवीजन (हिसार) आई कॉर्प्स का हिस्सा है, जो सेना का मैदानी फॉर्मेशन है। आई कॉर्प्स सेना की स्ट्राइक फोर्स है। आई कॉर्प्स की स्थापना 1965 में की गई थी। आई कॉर्प्स के कमांडर लेफ्टिनेंट प्रकाश चंद कटोच हैं। 
50 वीं पैराशूट ब्रिगेड
यह ब्रिगेड भारतीय सेना का फॉर्मेशन है। इसकी स्थापना 1941 में हुई थी। इसका मुख्यालय आगरा में है।  

Tuesday, April 3, 2012

भगवान महावीर के जीओ और जीने दो के सिद्घांत को जीवन में आत्मसात करें - मुख्यमंत्री


जयपुर, 3 अप्रेल। मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत ने महावीर जयंती के अवसर पर प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी है।
अपने संदेश में श्री गहलोत ने कहा कि भगवान महावीर स्वामी ने अपने उपदेशों एवं जीवन के माध्यम से मानव को सत्य, अहिंसा, अस्तेय एवं अपरिग्रह की राह दिखाई। वर्तमान भौतिकवादी युग में शांति, सद्भाव, अहिंसा, विश्व बंधुत्व, सभी जीवों से प्रेम करने के उनके सिद्घांत और अधिक प्रासंगिक हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जीओ और जीने दो के भगवान महावीर के सिद्घांत पर चलकर विश्व में शांति एवं अमन-चैन संभव है। उन्होंने कहा कि आज के इस पावन दिन के अवसर पर हमें भगवान महावीर के आदर्शों को जीवन में आत्मसात् करने का संकल्प लेना चाहिए।

सितारों संग IPL-5 का रंगारंग उद्घाटन आज


नई दिल्ली:  विश्व के सबसे महंगे ट्वेंटी-20 क्रिकेट टूर्नामेंट यानी इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के पांचवें संस्करण का उद्घाटन समारोह मंगलवार रात चेन्नई के वाईएमसीए मैदान पर होगा।

इस समारोह में अमेरिकी पॉप स्टार केटी पेरी अपनी प्रस्तुति देंगी। देश के बेहतरीन नर्तक व टॉलीवुड अभिनेता प्रभु देवा भी इसमें शिरकत करेंगे। मेगास्टार अमिताभ बच्चन, प्रसून जोशी की एक कविता के साथ आईपीएल का उद्घाटन करेंगे।

बॉलीवुड की ओर से इस मौके पर करीना कपूर, प्रियंका चोपड़ा, सलमान खान भी अपना जलवा बिखेरेंगे। समारोह की मुख्य आकर्षण पेरी होंगी, जो पहली बार भारत आई हैं। पेरी की प्रस्तुति देखने के लिए लोगों में खासा उत्साह है।

अमिताभ ने हाल ही में ट्विटर पर लिखा था कि आईपीएल समारोह के लिए वह चेन्नई में हैं और चेन्नई उनके दूसरे घर के जैसा है। उनका कहना था कि इस शहर में उन्होंने कई फिल्मों में काम किया है और यह शहर अनुशासित और सांभ्रात लोगों का है।


समारोह में प्रभु देवा अपने बेहतरीन नृत्य से लोगों को मंत्रमुग्ध करते नजर आएंगे। बॉलीवुड अदाकारा प्रियंका और करीना की प्रस्तुति भी देखने लायक होगी। आईपीएल के पांचवें संस्करण के मैच चार अप्रैल से 27 मई तक होंगे। इस टूर्नामेंट में नौ टीम हिस्सा ले रही हैं। 12 अलग-अलग स्थानों पर 76 मैच खेले जाएंगे। उद्घाटन समारोह में नौ टीमों के कप्तान भी मौजूद रहेंगे।

टूर्नामेंट की औपचारिक शुरुआत बुधवार से होगी। इस दिन एक मैच खेला जाएगा। मौजूदा चैम्पियन चेन्नई सुपर किंग्स टीम अपने घरेलू मैदान पर मुम्बई इंडियंस से रात आठ बजे भिड़ेगी।

चिट्ठी लीक में सेना प्रमुख को क्लीन चिट: सूत्र


नई दिल्ली : सेना प्रमुख जनरल वी.के. सिंह द्वारा प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को लिखी गोपनीय और संवेदनशील चिट्ठी के लीक होने की जांच कर रही आईबी की प्रारंभिक रिपोर्ट आ गई है। सूत्रों के अनुसार, आईबी ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट में जनरल सिंह को क्लीन चिट दे दी है। हालांकि, इस मामले में अभी दोषी शख्स का नाम सामने नहीं आया है। सेना प्रमुख ने यह चिट्ठी पिछले महीने की 12 तीरीख को लिखी थी।


प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में सेना प्रमुख ने चेताया था कि सेना के पास हथियार और गोला-बारूद खत्म हो गए हैं। विपक्षी दलों के एक वर्ग ने चिट्ठी के लीक होने के लिए सेना प्रमुख पर कड़े प्रहार किए। इस पर जनरल सिंह ने भी एक बयान जारी कर इसे देशद्रोह की संज्ञा दी थी। सेना प्रमुख का कहना था कि ये आरोप उनकी प्रतिष्ठा गिराने के लिए लगाए जा रहे हैं। 14 करोड़ रुपए की रिश्वत की पेशकश तथा चिट्ठी लीक प्रकरण पर बवाल मचने के बाद जनरल वी.से सिंह और रक्षा मंत्री ए.के. एंटनी ने सोमवार को पहली बार मुलाकात की।

Monday, September 27, 2010

नशे की बुराई से जुझती श्रीगंगानगर पुलिस



श्रीगंगानगर। कहते हैं कि जहाँ धन, सम्पदा एकत्रित होती है तो वह कुछ बुराईयां भी अपने साथ लाती है। कुछ ऐसा ही हुआ है राजस्थान के सबसे अधिक राजस्व आय वाले कृषि प्रधान जिले गंगा नगर में। गत वर्षों में ज्यों-ज्यों इस जिले ने शिक्षा के विस्तार के साथ-साथ आर्थिक, सामाजिक व राजनैतिक क्षेत्र में तरक्की की रफतार पकडी त्यों-त्यों जिले के सभी आयु वर्ग के लोगों में नशीले पदार्थों यथा गांजा, चरस, पोस्त, शराब, गुटखा, जर्दा, व नशीली दवाईयों जैसे गोलियां कैप्सूल और कफ सिरप व यहाँ तक कि व्हाईट फल्यूइड का इस्तेमाल नशे के विकल्प के रूप बढता गया है। हालात यह है कि आज हजारों घरों के लाखों युवक, युवतिया व स्कूलों में पढने वाले विधार्थियों के चोरी छिपे नशे के आदी होने के कारण परिवारों में अनेक प्रकार की समस्याएं व विवाद बढते जा रहे हैं। नशे की इस बढती प्रवृति से युवाओं में उच्छखंलता व उन्माद बढा है। नशे की प्रवृति के चलते अनेक युवा अपना बेशकीमती जीवन गंवा चुके हैं व हजारों परिवार बर्बादी की राह पर है। अनेक घरों में जहाँ बुढे माँ-बाप का एक ही नौजवान सहारा है वह भी नशे की लत के चलते जीवन को तबाह करने से नहीं चूक रहा है। जिले के युवाओं की हालत ऐसी खराब हो चली है कि वे किसी की सुनने को ही तैयार नहीं है।

क्यों करते हैं नशा

        इस क्षेत्र में नशाखोरी के शिकार लोगों में एक आम धारणा व्याप्त है कि इससे उनकी कार्यक्षमता में वृद्वि होती है व नशा करने के बाद वे तनाव मुक्त महसूस करते है इसके अलावा अधिकांश नशाखोर लोगों का मानना है कि इससे उन्ह एक अलग तरह के आनंद की प्राप्ति होती है।इसके अलावा इस जिले के लोगों के सामाजिक, आर्थिक रिश्ते पंजाब के लोगों की जीवन शैली से भी प्रभावित है। पंजाब में शराब, पोस्त आदि को बुरी लत नहीं माना जाता व इन चीजों का सेवन वहाँ अधिकांश लोग अपने बच्चों व बडों के सामने करते हैं। बच्चे कतुहलवश व अज्ञानतावश भी नशे की आदतों के शिकार हो जाते हैं। इस परिवेश का फैलाव इस जिले में भी हो गया है रही सही कसर जिले में छायी पॉप संस्कृति ने पूरी कर दी है आम तौर पर जिले में होने वाली शादिय, समारोहों व अन्य पार्टियों में शराब व अन्य नशे की चीजो का खुल कर इस्तेमाल होता है।

                 जिले की सीमा पाकिस्तान से लगी होने के कारण भी मादक पदार्थों के अवैध कारोबारी तस्करी कर इन चीजों की आपूर्ति अपने गुर्गों के माध्यम से करते हैं। इसके अलावा बच्चों व युवाओं में शराबखोरी व अन्य नशे की चीजों के सेवन के पीछे कारण उनके माँ-बाप या अन्य परिजन भी हैं क्योंकि जब इस आयु वर्ग के लोग अपने परिजनों, सगे-सम्बधियों को नशे की चीजों का सेवन करत हुए देखते हैं तो धीरे-धीरे वे भी इन चीजों के सेवन के शौकीन हो जाते हैं। जब वे नशे के आदी हो जाते हैं तो वे अनुचित योन व्यवहारों में भी श्शरीक होने लगते है। नीम-हकीम भी इन नशे के आदियों व युवाओं को पौरूष बढाने के नाम पर नशे की चीजें परोसते हैं। नशे की प्रवुति के शिकार लोगों में 4॰ पतिशत से अधिक लोग 16 वर्ष से उपर की आयु के हैं। सुत्र बताते हैं कि इस आयु के लोग जिले के विभिन्न साईबर कैफे व अन्य सुत्रों से अश्लील फिल्में देखते हैं व उन्मुक्त यौन व्यवहार को बढावा देने वाला साहित्य पढते हैं। इन सब से जागृत कुंठाओं की पूर्ति के लिए भी युवा पीढी नशे का शिकार हो रही है।

जिले की भौगोलिक परिस्थितियां

                 श्रीगंगानगर जिले की भौगोलिक परिस्थिति कुछ ऐसी है कि यह नशीली वस्तुओं के अवैध कारोबारियों, तस्करों के लिए एक महफूज जगह बन गया है। जिले की एक सीमा पाकिस्तान से लगती है तो दूसरी सीमा पजांब से लगती है। इस कारण इस जिले में पाकिस्तान व पंजाब के रास्ते से होकर अनेक प्रकार के मादक पदार्थ युवाओं के हाथ में बेरोक-टोक पहच रहे हैं।

जिला पुलिस के सराहनीय कदम

               परन्तु जिला पुलिस ने भी नशे की इस बुराई से जुझने व युवक-युवतियों को नशे की लत से छुटकारा दिला कर फिर से हँसता-खेलता सामान्य जीवन जीने की राह दिखाने के लिए सन् 1992 से कमर कस रखी है। जिला पुलिस ने चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से एक विशेषज्ञ चिकित्सक डॉ॰ रविकान्त गोयल की सेवाएं लेकर एक नशा मुक्ति केन्द्र चला रखा है। डॉ॰ रविकान्त गोयल ने तो मानों इन नशा मुक्ति शिविरों को जीवन का एक अभिन्न अंग ही बना लिया है। जिले के नागरिकों के दर्द को उन्होंने अपने सीने से लगा रखा है व वे हमेशा ऐसे शिविरों की रूपरेखा में ही व्यस्त रहते हैं। इस केन्द्र के अधीन जिला पुलिस के सभी छोटे-बडे अधिकारियों ने एकदम सकारात्मक भाव के साथ समर्पित होकर अभी तक 1॰ दिवसीय 38 आवासीय कैम्प लगाये हैं जो कि एक मिसाल है।

                    इन आवासीय नशामुक्ति शिविरों का आयोजन पुलिस अधिकारी व कर्मचारी व अन्य विभागों के अधिकारी जन सहयोग से करते हैं। नशे के आदी लोगों को 1॰ दिन तक केन्द्र में उपाचाराधीन रखा जाता है। इस शिविर में आने वालों के आवास व भोजन की व्यवस्था केन्द्र द्वारा जन सहयोग से की जाती है ं। अभी तक 4॰, ॰॰॰ से अधिक युवक, युवतियां व अन्य आयु वर्ग के लोग इन शिविरों से लाभ उठा चुके हैं। जिले में जो भी पुलिस अधीक्षक आये, सभी ने इस जिले को नशामुक्त बनाने के लिए दिल से प्रयास किये व हजारों लोगों की जिन्दगी व उनके परिजनों को फिर से आशा की किरण दिखाई है।

                         चाहे वे सुधीर प्रताप सिंह, लक्ष्मण मीणा, के.नरसिंहराव, वी.के. गोदिका, आलोक त्रिपाठी, रवि प्रकाश मेहरडा, आर.पी. सिंह, चुन्नी लाल, यू.आर साहू, सुनील दत्त, सौरभ वास्तव, विनिता ठाकुर, आलोक वशिष्ठ, उमेश चन्द्र दत्ता या वर्तमान में पुलिस अधीक्षक के पद पर पदस्थापित रूपिन्द्र सिंह हों सभी ने नशे जैसी बुराई से लडने में कोई कसर नहीं छोडी। जिला पुलिस के इस अभिनव प्रयत्न में क्षेत्र के सभी वर्गों की जन सहभागीदारी भी प्रशंसनीय है। पुलिस अधिकारियों व जनता की भागीदारी से श्मात्र शिविरों से श्शुरू हुआ यह अभियान एक बडा रूप ले चुका है। 1996 में जब के. नरसिंहराव जिले के पुलिस अधीक्षक थे, तब उनके प्रयासों से स्थायी नशा मुक्ति केन्द्र की स्थापना की गई।

               यधपि जिला पुलिस ने समय-समय पर अनेक बार सघन अभियान चला कर नशाीली दवाएं व अन्य मादक पदार्थ इनके अवैध कारोबारियों से बरामद किये हैं लेकिन नशा करने वालों व मादक पदार्थों की आपूर्ति करने वालों के बीच सीधा गठजोड पुलिस के लिए सिर दर्द बना हुआ है।



नशाखोरी की मूल जडों पर भी पुलिस का प्रहार

विद्यार्थियों में नशे के विरूद्व जागरूकता हेतु शिविर

नशे की आदतों के शिकार हो चुके लोगों को नशा मुक्ति की ओर अग्रसर करना ही जिला पुलिस ने पर्याप्त नहीं समझा। जब पुलिस अधिकारियों ने देखा कि उच्च प्राथमिक व माध्यमिक कक्षाओं के विधार्थी भी नशे की लत के शिकार होते जा रहे ह तो पुलिस ने गत दिनों तत्कालीन पुलिस अधीक्षक आलोक वशिष्ठ, उमेश चन्द्र दत्ता व वर्तमान पुलिस अधीक्षक रूपिन्दर सिंह के मार्गदर्शन में इस केन्द्र ने विधार्थियों को नशे की प्रवृति से बचाने के लिए अवेयरनेस कैम्प लगाने श्शुरू किये। इन शिविरों में छोटे-कस्ब, गांवों, ढाणियों व शहरों में मोहल्लों में विधार्थिया, उनके परिजनों व नागरिकों व ग्रामीणों को ईकठा कर उन्हें नशा क्या है, इसके नुकसान क्या है व इससे बचाव के क्या उपाय है, व नशे के बारे में उनमें व्याप्त गलत फहमियों आदि के बारे में जागरूक बनाया जाता है। साथ ही इन सब को आजीवन नशे की लत से बचे रहने की शपथ बहुत ही सकारात्मक मार्गदर्शन के साथ दिलवायी जाती है। गत ढाई वर्ष से चल रहे इस अभिनव प्रयोग के भी अनेक सार्थक प्रभाव सामने आये हैं व जनता की सहभागिता बढी है। इस अभियान में शिक्षा विभाग के सहयोग से अभी तक एक लाख बच्चों को नशा मुक्ति के विरूद्व जागरूक किया जा चुका है। नशा मुक्ति शिविरों हेतु श्शुरू से ही अपनी सर्मपित सेवाएं देने वाले व नशा मुक्ति केन्द्र के प्रभारी डॉ. रविकान्त गोयल दिन-रात मेहनत कर जिला पुलिस के इस अभिनव अभियान को अनवरत् जारी रखे हुए हैं।



मोती लाल वर्मा

(प्रचार) पुलिस मुख्यालय, जयपुर।

Sunday, May 30, 2010

‘रंग लाई मेहनत’

मेहनत से चमक उठी बावडी

उदयपुर, 30 मई। जल ही जीवन हैं, जल हैं तो कल हैं के जयकारों के साथ आज जब हाथ से हाथ सफाई अभियान की और जुडते गये तो वर्षों ंसे गंदगी से अटी पडी बावडी अपना सौंनदर्य निखान उठी। जल बचाओ मुहिम के तहत रविवार को यहां के संज्ञान सेवा संस्थान के कार्यकर्ताओं ने सूरजपोल स्थित ऐतिहासिक बावडी की सफाई की। बावडी को इसके बाद स्वच्छ जल से धोया गया ताकि वर्षा ऋतु में यह बावडी जल से सराबोर हो जाये।



सफाई अभियान के दौरान संस्थान के जयप्रकाश माली, घनश्याम सिंह भिण्डर, भूपेन्द्र चौहान, मेवाड गौरव विकास परिषद् के घनश्याम गर्ग, राजेन्द्र बंसल, गोविंद ओड, मनोज यादव, नन्दकिशोर, कार्तिकेश सिंह सहित कई कार्यकर्ता उपस्थित थे।

Wednesday, May 12, 2010

दूध दही के प्रदेश में शराब की नदियां


एक साल में 10 लाख प्रूफ लीटर बढ गया सिरसा का कोटा

- राजेन्द्र गुप्ता -

सिरसा, 12 मई। देसां मा देस हरियाणा, जित दूध दही का खाणा। हरियाणा की यह पारंपरिक कहावत और संस्कृति रही है। हमारे यहां दूध-दही का खाना देहात और शहर का प्रतीक माना जाता था लेकिन बदलते समय के साथ दूध दही का खाना तबदील होता जा रहा है।

              हालात यह हैं कि अखाडों में पहलवानी करने वाले हरियाणवी नौजवान नशों की गिरफ्त में फंसते चले जा रहे हैं। दूध का स्थान दारू ने ले लिया है। पहले जहां शराब के अहातों की तरफ लोग घृणा की दृष्टि से देखते थे, उन्हीं अहातों में अब अच्छे-अच्छे घरों के फरजंद टोलियां बनाकर बैठे आम देखे जा सकते हैं। यही स्थिति साथ लगते राज्य पंजाब की भी है। पिछले 5 वर्षों से जिस ढंग से शराब के ठेके और अहातों की संख्या बढी है और शराब की आपूर्ति का स्तर बढा है वह चौंकाने वाला है। ठीक वैसा ही जैसा दूध की कम होती खपत का तथ्य। घरों में दूध पीने का प्रचलन समाप्त होता जा रहा है।

          हालात यह हैं कि सिरसा जिला में अंग्रेजी शराब का जो कोटा पिछले साल 1 लाख 91 हजार 227 प्रूफ लीटर था वह इस साल बढकर 11 लाख 21 हजार 514 प्रूफ लीटर तक पहुंच गया है। इसी तरह देसी शराब का कोटा भी पिछले साल के मुकाबले बढा है। बीयर की बिक्री भी गर्मी के मौसम में काफी बढी है। हर रोज लगभग 1॰ हजार बीयर की बोतलें प्रयोग होती हैं। पहले जहां शराब में मिलावट की खबरें आती थीं लेकिन चौंकाने वाला तथ्य यह भी है कि बीयर में भी मिलावट करके बेचा जा रहा है। एक तरफ शराब के रेटों में इजाफा और दूसरी तरफ अहातों पर लूट। युवा वर्ग बिना किसी रोजगार के शराब पर जब पैसा लुटाएगा तो उसका हश्र आपराधिक घटनाओं की वृद्धि के साथ ही जोडकर देखा जा सकता है।

         अभी पिछले दिनों पंजाब सरकार ने विधानसभा में नियम पास करके 21 साल से कम आयु के किशोरों को शराब बेचने या पिलाने पर प्रतिबंध लगाया है। सरकार की यह चिंता पंजाब में बढ रही नशाखोरी की ओर इंगित करती है जहां कम आयु के किशोर शराब के नशे की दलदल में फंसे हुए हैं। शराबनोशी की घटनाओं के बढने के साथ ही गांवों में कच्ची शराब निकालने का धंधा भी बडे पैमाने पर फल-फूल रहा है। सिरसा जिला के रोडी व कालांवाली क्षेत्र सहित पूरे जिला में कच्ची शराब बडे पैमाने पर निकाली जाती है। ऐसे तस्करों के आगे पुलिस का नेटवर्क भी विफल दिखाई देता है। पुलिस कागज पूरे करने के लिए दो-चार लोगों से कुछ बोतल शराब पकडकर बेशक अपनी पीठ थपथपा लेती हो लेकिन हकीकतन शराब की तस्करी को रोक पाना पुलिस के लिए भी टेढी खीर है।

            हरियाणा में इन दिनों निकाय चुनाव शबाब पर हैं। चुनावों में मतदाताओं को रिझाने के लिए खूब शराब परोसी जा रही है। यद्यपि प्रशासन ने दो दिन तक ठेके बंद रखने के निर्देश दे दिए हों लेकिन उम्मीदवारों ने तो पहले ही अपने अपने हिस्से के कोटे खरीदकर पूरी तैयारी की हुई है। मुफ्त में शराब मिलने के कारण युवा वर्ग में इसके प्रति रुझान बढा है। देर रात तक लोग शराब के नशे में सडकों पर घूमते आम दिखाई देते हैं। हाल ही में शराब के अधिक सेवन से एक व्यक्ति की मौत भी हो चुकी है लेकिन प्रशासन और पुलिस इसे संज्ञान में नहीं ले रहे। संभ्रांत लोगों का कहना है कि जिस तरह से पंजाब सरकार ने युवाओं में शराबखोरी रोकने के लिए कानून लागू किया है वैसे ही हरियाणा सरकार को भी निर्णय लेना चाहिए ताकि युवा पथभ्रष्ट न हो सकें और वे अपने भविष्य के प्रति गंभीर हों।

Monday, April 26, 2010

 शिकारियों के मुंह का निवाला बनते वन्य जीव



सचिन बंसल/सुभाष गुप्ता



हनुमानगढ, 25 अप्रैल। ‘‘भूरे रंग के मासूम हरिण के पीछे खुंखार कुत्ते लगे हैं। वह बदहवास हालत में जान बचाने के लिए खेतों में दौडता जा रहा हैं, लेकिन कुत्तें ज्यादा फुर्तिले निकलते हैं। इसी दौरान कुत्तों का मालिक वहां पहुंच कर धारदार हथियार के एक ही वार से हरिण की गर्दन धड से अलग कर देता हैं।’’ ऐसे दृश्य हनुमानगढ जिले के विभिन्न खेतों में आम तौर पर देखने को मिल जाते हैं। खेतों में विचरण करने वाले हरिण तथा अन्य वन्य जीवों कों इधर इसी तरह से मारा जा रहा हैं। लगातार हो रहे शिकार की वजह से क्षेत्र में इन वन्य जीवों की तादाद लगातार घटती जा रही हैं।



इस क्षेत्र में नहरें आने के साथ खुशहाली आई तो साथ-साथ व्यसन भी बढे। मांस और मदिरा का चलन तो अब घर-घर हो गया। मांसाहारी लोग नित नए लजीज गोश्त की तलाश में रहने लगे। गांवों के बडे किसानों की लाइसेंसी/गैर लाइसेंसी बंदूके इन जीवों का सीना छलनी करने लगी। क्षेत्र में तीतर, खरगोश वगैरह का शिकार तो धडल्ले से होता ही हैं, सम्पन्न परिवारों के लोग हरिणों को मारकर खाने में कुछ ज्यादा ही रूचि लेते हैं। बंदूक की गोली हरिण पर चलाने से परहेज तो नहीं, लेकिन जब पालतू कुत्ते ही बंदूक का काम कर दें तो गोली जाया करना शिकार के ये शौकीन पसंद नहीं करते।



ग्रामीण क्षेत्रों में अपने मालिक के लिए हरिण को मार देने का काम कुत्ते बखूबी कर देते हैं और किसी के ऊपर शिकार का आरोप भी आमद नहीं होता। गत दिवस एक गांव में एक हरिण का शिकार इसी तरीके से किया गया। वन विभाग को इस बारे में पूरी जानकारी हैं, लेकिन वह कुछ नहीं कर पा रहा।

वन्य जीवों के शिकार की ताजा घटनाओं को देखे तो गत दिवस ही जिले के भिरानी थाना क्षेत्र में हरिण का, आठ एसपीडी में खरगोश का शिकार हुआ। इसके अलावा बीते वर्ष की बात करें तो सरदारपुर खालसा में एक साथ पांच मोरों का शिकार किया गया। इसके अलावा हरिण, खरगोश, नीलगाय के शिकार कई मामले थे। इन मामलों में ये वन्य जीव शिकारियों के हाथों मौत का शिकार हो गये, लेकिन बिश्ा*ोई समाज के लोगों की जागरूकता के कारण शिकारी इन वन्य जीवों को अपना निवाला नहीं बना सके तथा उनके खिलाफ मुकदमें भी दर्ज करवाए गए।

हनुमानगढ जिले में विभिन्न स्थानों पर गीदड, नीलगाय, सुअर, खरगोश, हरिण आदि वन्य जीव सैंकडों की तादाद में हैं। पक्षियों में मोर, तीतर, सैह, बगुला व बतख वगैरह पाए जाते हैं। इसके अलावा सांप और नेवले, गोह का शिकार करने से भी नहीं चुकते। संरक्षित क्षेत्र के अभाव में ये सभी पशु-पक्षी खुले खेतों में विचरण करते हैं और शिकारियों केहाथों शिकार हो रहे हैं। हनुमानगढ जिले में कैंचियां, लखासर, हरदयालपुरा, लिखमीसर, बिलौचावाली, गोलूवाला, जाखडांवाली, लुढाणा, रावतसर चोहिलांवाली, मैनावाली, गिलवाला, किशनपुरा उत्तरादा आदि स्थानों पर ये वन्य जीव पाए जाते हैं। हरिणों कें अलावा सबसे अधिक मौत की तलवार खरगोश और तीतरों पर लटकी रहती हैं। सैंकडों तीतर और खरगोशों को तकरीबन रोज मारकर निवाला बना लिया जाता हैं। खरगोश को एक विशेष प्रकार के लोहे के शिकंजे में फांसा जाता हैं। खेतों और झाडियों के इर्द-गिर्द ये शिकजें डाल दिए जाते हैं। रात के अंधेरे में जैसे ही खरगोश बिलों से बाहर निकलते हैं, इन शिकजों में उनकी टांगे फंसकर टूट जाती हैं। सुबह शिकारी उन्हें पकडकर मौत के घाट उतार देते हैं। शिकारी इन जीवों को पकडने के लिए करका, टोपीदार बंदूक, जहरीला दाना, गुलेल के अलावा शिकारी कुत्तों का इस्तेमाल करते हैं।

क्षेत्र में तीतर का शिकार भी बहुतायत से होता हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में कुछ जाति विशेष के लोग रोजाना बडी तादाद में तीतरों का शिकार करते हैं। वन विभाग के मापदंडों के अनुरूप वन्य जीवों की गणना जिस प्रकार वन्य प्राणियों के लिए संरक्षित क्षेत्रों में होती हैं, उस तरह से इस क्षेत्र में इन निरीह प्राणीयों की गणना भी वन विभाग उजागर नहीं करता। कभी हनुमानगढ में सियार, नीलगाय, चिंकारा, जंगली सुअर, लोमडी, बंद तथा हरिण काफी संख्या में पाए जाते थे, लेकिन बढते शिकार के कारण आज इनमें से कई तो लुप्तप्रायः हो गये हैं तथा कुछ होने को हैं।

Tuesday, April 13, 2010


 : फर्जी रजिस्ट्री प्रकरण :


मुर्गा बन किया प्रदर्शन

हनुमानगढ, 13 अप्रैल। फर्जी रजिस्ट्री से भूखण्डों पर काबिज होने के मामले में कार्यवाही नहीं होने के विरोध में आंदोलनरत नागरिक सुरक्षा मंच के सदस्यों ने आज मुर्गा बनकर प्रदर्शन किया। इस अनोखे प्रदर्शन का उद्देश्य शहीदों की प्रतिमा के समक्ष शर्मिंदगी महसूस करना रहा। जंक्शन स्थित भगत सिंह चौक पर आज प्रातः नागरिक सुरक्षा मंच के अध्यक्ष एडवोकेट शंकर सोनी, कर्नल राजेन्द्र शर्मा, चानणराम वर्मा, बार संघ के पूर्व अध्यक्ष जितेन्द्र सारस्वत, डीवाईएफआई के प्रदेशाध्यक्ष रघुवीर वर्मा, सीटू के रामकुमार, बलराम मक्कासर, अनिल कडवासरा, अमित गोदारा, पूर्व पालिकाध्यक्ष यादवन्द्र शर्मा आदि सदस्यों ने मुर्गा बनकर फर्जी भूखण्ड रजिस्ट्री प्रकरण के मामले में कोई कार्यवाही नहीं होने पर विरोध दर्ज कराया।




इस अवसर पर एडवोकेट शंकर सोनी ने कहा कि असामाजिक लोग किस तरह अव्यवस्थाओं पर हावी है इसका प्रमाण फर्जी रजिस्ट्री प्रकरण से देखने को मिल रहा है। ऐसे में शहीदों की प्रतिमा के समक्ष शर्मिंदगी महसूस करने के अलावा कोई ओर चारा नहीं है। मुर्गा के रूप में प्रदर्शन के बाद नागरिक सुरक्षा मंच के सदस्यों ने यहां सांकेतिक धरना दिया। धरना के दौरान फर्जी रजिस्ट्री प्रकरण मामले में पुलिस के विरूद्ध नारेबाजी की गई।

हनुमानगढ टाऊन स्थित टाइम्स शिक्षा महाविद्यालय में आयोजित रंगोली प्रतियोगिता के दौरान छात्राओं ने रंगोली के माध्यम से हमारे राष्ट्रीय पक्षी मोर को बचाने का संदेश दिया।

छाया ः राजेन्द्र वाट्स



सुर-ताल व लय की बिखरी सुगंध

शास्त्रीय गायिका श्रीमति सुनंदा शर्मा ने दी भाव-विभोर प्रस्तुति

हनुमानगढ, 12 अप्रैल। शास्त्रीय गायिका श्रीमति सुनंदा शर्मा ने सोमवार को आयोजित कार्यक्रम में संगीत की भीनी सुगन्ध बिखेरकर श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया।



कार्यक्रम का आयोजन स्पिक मैके की नृत्य श्रृंखला के तहत जंक्शन स्थित ई-ज्ञान आईटीआई कॉलेज में किया गया। श्रीमति शर्मा ने कार्यक्रम का आरंभ राग जौनपुरी से किया। जिसमें उन्होंनें ‘मेरे कान भनकता परी लोरी’, मोरी मां, जब आवेंगे लालन मोरे मंदिरवा’’ गाये।
                                                                                           

               
उन्होंने अगली कडी में टप्पा ‘मियां नजरें नहीं आदां वे, मुखडा दिखाके दिल ले जादां वे’’ सुनाते हुए बताया कि पंजाब में ब्याह शादियों में गाए जाने वाले टप्पे में मुग्ल शासकों से उर्दु शब्द शामिल करते हुए शास्त्रीय संगीत की घुमावदार लहरियों का प्रयोंग किया जाता हैं। इसके बाद उन्होंने राग मिश्र देस में गाई गयी ठुमरी ‘हे मां कारी बदरिया बरसे, पिया नहीं आए’ प्रस्तुत किया। उन्होंने अपने कार्यक्रम का समापन श्रोताओं की मांग पर ‘रंग डारूंगी नंद के लालन पे’ नामक होरी सुनाकर की। उनके गंभीर और स्पष्ट स्वर ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।



श्रीमति सुनंदा शर्मा बनारस घराने की शास्त्रीय गायिका तथा पद्मभूषण श्रीमति गिरिजा देवी की सुयोग्य शिष्य हैं। इस दौरान उन्होंने कहा कि शास्त्रीय संगीत रूह की चीज हैं, व इसे रूह से ही महसूस किया जा सकता हैं। कार्यक्रम में तबले पर उनका साथ सरितदास, हारमोनियम पर जमीर खान व गायनप में सुश्री तृप्ति शर्मा ने दिया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्जवलित कर किया गया।

पठानकोट में जन्मी श्रीमति सुनंदा शर्मा के प्रथम गुरू उनके पिता सुदर्शन शर्मा हैं। उनके अनुसार लगन, समर्पण, धैर्य, उचित गुरू के द्वारा ही संगीत के क्षेत्र में कदम रखना चाहिए। श्रीमति शर्मा का कहना हैं कि शास्त्रीय संगीत का दूसरा हिस्सा उपशास्त्रीय संगीत हैं। उपशास्त्रीय संगीत एक गुलदस्ता हैं, जिसकी गायकी में हमें थोडी छूट मिल जाती हैं। जीवन में संगीत के आ जाने से त्रुटियां समाप्त होने लगती हैं।

बनारस घराने की गायिका सुनंदा शर्मा ने ख्याल और पूरब अंग की ठुमरी, कजरी, चैतो, टप्पा आदि को गाने में अपना नाम जोडा हैं।

कार्यक्रम के अंत में ई-ज्ञान आईटीआई कॉलेज के संचालक हितेश शर्मा ने स्पिक मैके व कलाकारों का आभार व्यक्त किया। स्पिक मैके, हनुमानगढ के संरक्षक कर्नल राजेन्द्र शर्मा ने बताया कि स्पिक मैके के माध्यम से ही आमजन ऐसे उच्चकोटि के कलाकारों से रूबरू हो सकते हैं। मंच का संचालन रजनी बब्बर ने किया।

Friday, April 9, 2010

सिरसा जहां हर रोज होता है रक्तदान

1 लाख से भी अधिक रक्तदाता हर वक्त रहते है रक्तदान के लिए तैयार


राजेन्द्र कुमार

सिरसा, 9 अप्रैल। बशर्ते भौगोलिक लिहाज से सिरसा जिला हरियाणा प्रदेश के पश्चिमी छोर पर है मगर बात रक्तदान की आए तो सिरसा ने समुचे हिंदुस्तान में एवरेस्ट को छू लिया है। ऐसा कोई दिन नहीं जब जिला सिरसा के किसी कोने में रक्तदान शिविर का आयोजन न होता हो। प्रदेश में शैक्षणिक लिहाज से हमेशा ही पिछडा कहे जाने वाले इस जिला के लोगों में रक्तदान के प्रति अलख जगाने का श्रेय यहां के जिला उपायुक्त युद्धबीर सिंह ख्यालिया को जाता है। रक्तदान में सर्वप्रथम छह घंटे के समयकाल में 2451 यूनिट रक्त एकत्रित कर सिरसा ने 1॰ जनवरी 1997 को विश्व की गिनीज बुक अपना नाम दर्ज करवाया है। आज के दिन भी सिरसा जिला से जुडे डेरा सच्चा सौदा का 17 हजार 921 यूनिट रक्त एकत्रित करने का विश्व रिकार्ड कायम है।

चिरकाल से जिला सिरसा की ग्रामीण पृष्ठभूमि में विराजमान मृत्युभोज, दहेज प्रथा, पर्दा प्रथा अगर आज के हालातों को देखे तो बीते जमाने की बात लगती है। रक्तदान के प्रति जगी अलख का हश्र यह है कि आज पूण्यतिथि, विवाह, जन्मोत्सव, सेवानिवृति, प्रतिष्ठान स्थापना वर्षगांठ जैसे समारोह में नित्य प्रति कुरीतियां दोहराए जाने की बजाय रक्तदान का आयोजन हो रहा है। सिरसा में 26 अगस्त 1999 को तत्कालीन उपमंडलाधीश युद्धबीर सिंह ख्यालिया के प्रयासों से शिव शक्ति ब्लड बैंक की स्थापना हुई तो लोग रक्तदान का नाम लेने से कांपते थे। किसी के शारीरिक कमजोरी का भय था तो किसी के नेत्र ज्योति चले जाने का, मगर आज हालात कतई विपरीत है। शादी का आयोजन हो या फिर मृत्यु उपरांत बारहवीं की रस्म तो जहां एक ओर पंडित जी धार्मिक अनुष्ठान करते है तो दूसरी और सजा होता है रक्तदान का दीवान। जब से युद्धबीर सिंह ख्यालिया ने सिरसा के जिला उपायुक्त का कार्यभार संभाला है तब से रक्तदान तो मानो दिनचर्या का एक हिस्सा बनकर रह गया है। सिरसा जिला की ग्रामीण पृष्ठभूमि से जुडी महिलाएं जहां कभी घुंघट का पट नहीं खोलती, आज रक्तदान के लिए बाजू में 16 जी की सुई से रक्तदान के लिए कतई चुभन महसूस नहीं करती। महिलाओं में रक्तदान के प्रति जागृति पैदा करने का श्रेय जिला उपायुक्त की धर्मपत्नी श्रीमती किरण ख्यालिया को जाता है। जिला के किसी भी कोने में रक्तदान का आयोजन हो रहा हो तो उपायुक्त दंपत्ति को सहज ही पाया जा सकता है।

रक्तदान आयोजन कर्ताओं के छोटे से आग्रह पर जिला उपायुक्त तुरंत रक्तदाताओं के बीच हाजिर होते है। इतना ही नहीं, स्वयं भी रक्तदान के लिए उनके बराबर लेट जाते है। उपायुक्त ख्यालिया जब गांव में केंद्र व राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं के कार्यक्रमों में शिरकत करते है तो रक्तदान को लेकर उनके मुख से रक्तदान को लेकर बरबस शब्द निकल ही पडते है। ख्यालिया द्वारा किया गया रक्तदान अनगिनत है। शिव शक्ति ब्लड बैंक ने जिला के जन-जन के इस पुण्य कार्य में मिले सहयोग के बाद निर्णय लिया है कि जिला से जुडे किसी भी मरीज को कतारबद्ध नहीं खडा होना पडेगा वहीं बदले में रक्तदान की भी आवश्यकता नहीं है। रक्त के प्रयोगशाला में जांच के बदले मात्र 35॰ रुपए अदायगी देनी पडती है जो समुचे हिंदुस्तान में सबसे कम है। इतना ही नहीं, अगर सिरसा जिला से जुडा कोई मरीज चंडीगढ या दिल्ली जैसे मैट्रो सिटी में जाकर रक्त की इच्छा जाहिर करे तो वहां भी उसे आसानी से रक्त उपलब्ध होता है।

इस संदर्भ में जिला उपायुक्त युद्धबीर सिंह ख्यालिया का कहना है कि उनका प्रयास है कि समुचा प्रदेश ही नहीं बल्कि देश रक्तदान में इतना सक्षम हो जाए कि आवश्यकता पडने पर चंद सैकिंड में रक्त हासिल हो सके। उपायुक्त ख्यालिया रक्तदान के लिए प्रेरणा देने के लिए रोहतक में आयोजित एक कार्यक्रम में स्टेट अवार्ड से सुशोभित हो चुके है। उन्होंने बताया कि 8 मई को विश्व रैडक्रॉस दिवस पर हरियाणा के राज्यपाल जगन्नाथ पहाडिया सिरसा में आयोजित राज्यस्तरीय समारोह में रक्तदान करने वाली विभूतियों को सम्मानित करेंगे। रक्तदान में सिरमौर पर पहुंचे सिरसा ने आपात अवस्था में रक्तदान की उपलब्धता के लिए सिरसा जिला में 1 लाख 4 हजार 2॰॰ स्वैच्छिक रक्तदाताओं की पहचान वैबसाईट पर उपलब्ध है, दुनिया का कोई भी जरुरतमंद व्यक्ति 222.ड्ढह्म्ड्ड1श्ाड्ढद्यश्ाश्ास्रस्रश्ाठ्ठश्ाह्म्.श्ाह्म्द्द पर स्वैच्छिक रक्तदाता के मोबाईल नंबर पर संफ कर स्वैच्छिक रक्तदाता से रक्त ले सकता है।

श्री ख्यालिया रक्तदान के प्रति सिरसा जिला के लोगों में जागृति के लिए जिला के उन लोगों को ही श्रेय का पात्र मानते है जिन्होंने इस पुण्य कार्य में अपना पूर्ण सहयोग दिया। शिव शक्ति ब्लड बैंक के अध्यक्ष डा. वेद बैनीवाल ने बताया कि बीते वर्ष में 385 शिविर आयोजित किए गए जिनमें 39 हजार 8॰2 यूनिट रक्त एकत्रित हुआ। वहीं दूसरी और डेरा सच्चा सौदा हर माह देश के वीर जवानों की खातिर स्वैच्छिक रक्तदान शिविर आयोजित कर इंडियन आमर्ड ट्रांसफ्यूजन सैंटर दिल्ली को 6॰॰ यूनिट रक्तदान प्रदान रकता है।

Sunday, April 4, 2010

’बजरंग बाण‘ गानेवाली पहली भजन सिंगर‘ - म्ाजू भाटिया

प्रस्तुति ः अशोक भाटिया मुंबई से
पिछले तीस साल से बिना किसी शौर शराबे या चर्चा के कृष्ण भक्ति में लीन भजन गायिका मंजू भाटिया देश विदेश में लगातार कृष्ण के भजनों की खूश्बू फैलाती आ रही हैं । बरसों से हरे रामा हरे कृष्णा मंदिर से अटैच मंजू भाटिया को उनके इस पवित्र कार्य के सदके हाल ही में मुबंई की एक मात्र सोशल वूमैन संस्था शैला वैल फेयर ट्रस्ट ने सम्मानित किया है । कृष्ण भजन गाते गाते अचानक मंजू जी ’बजरंग बाण‘ जैसा अध्याय गाकर पहली ऐसी भजन गायिका बन गई । जिसने इस अध्याय को गाने की हिम्मत दिखाई, वरना अभी तक हनुमान चालीसा तो लता मंगेशकर के अलावा कुछ और गायिकाओं ने भी गाया,लेकिन बजरंग बाण जैसे अध्याय को अभी तक किसी महिला गायिका ने नहीं गाया । इन दिनो साधना चैनल पर मंजू भाटिया द्वारा गाये बजरंग बाण की धूम मची हुई हैं । लिहाजा चैनल इसे दिन और रात बार बार प्रसारित कर रहा है । मीडिया के बीच लोकप्रिय मंजू जी से हाल ही में बजरंग बाण को लेकर एक छोटी सी बातचीत

- बजरंग बाण गाने की कोई खास वजह ?

दरअसल हनुमान एक ऐसे देवता रहे हैं,जिन्होंने बृह्मचर्य वृत लिया हुआ था । लिहाजा महिलायें उन से हमेशा दूर ही रहीं । लेकिन बरसों से ना जाने क्यों मैं ये धार्मिक अध्याय गाना चाहती थी । शायद उसकी भी वजह थी ?

- क्या ?
मैं जब छोटी थी तो मेरी मां बजरंग बाण गाया करती थी । जिसे मैं बहुत ध्यान से सुना करती थी । उसके बाद मैं जब मैं विधिवत रूप से भजन गाने लगी तो अक्सर मेरे दिमाग में इसे लेकर एक बात आती थी,कि मेरी मां भी तो एक महिला थी,और वे बजरंग बाण गाती थी,तो मैं क्यों नहीं । लिहाजा मैने इसे गाने का फैसला कर लिया ।

- इसे गाने के बाद क्या प्रतिकि्रयायें हासिल हुई ?
अरे भैया,पहले तो मुझे कितने ही लोगों ने टोकते हुये कहा था,कि अरे बजरंग बाण मत गाना,इसे सिर्फ पुरूष ही गाते हैं । लेकिन मैं जब उनसे वजह पूछती तो वे चुप हो जाते । और गाने के बाद जब मैं इसे लेकर एक चैनल पर गई तो सुनने के बाद उन्होंने इसे हाथों हाथ लिया । बाद में तो कई चैनलों ने इसे प्रसारित किया । आज भी ये साधना चैनल पर बार बार प्रसारित हो रहा है ।

- बजरंग बाण कब और क्यों गाया जाता है ?
दरअसल हनुमान विध्नहर्ता के रूप में विख्यात हैं,भूत प्रेतों तथा अन्य राक्षसी और शनि विपदाओं को वे पल भर में हर लेते हैं । लिहाजा इसे मंगलवार तथा शानिवार को गाया जाता है ।

- आफ द्धारा गाये गये रामायण के श्लोक भी काफी लोकप्रिय हुये थे ?
दरअसल रामायण का पाठ करीब दस दिनों में खत्म होता है । बाद में इसे एक सो आठ दोहों में इस प्रकार पिरोया गया कि आप रोजाना एक घंटे में पूरी रामायण का पाठ कर सकते थे । आप यकीन करेंगे ,मैने पहली दफा ’रामायण 108 मनके‘ 1986 में गाया था,उस दौरान इसे काफी पंसद किया गया था । लेकिन 2006 में साधना चैनल ने इसे नये सिरे से नई साज सज्जा के साथ रिलीज किया तो ये पहली बार से कहीं ज्यादा पापूलर हुआ था ।

- कुछ सालों से भजन प्रचार से दूर होता जा रहा है । कोई खास वजह ?
नहीं भैया, भजन कभी प्रचार से दूर नहीं हुआ,हां प्रचार का तरीका जरूर बदल गया है । वरना आप ही बताईये,पहले धार्मिक चैनल कितने हुआ करते थे ? लेकिन आज दर्जनो धार्मिक चैनल हैं । बाबा राम देव तो आज एक स्टार का दर्जा रखते हैं ।

- और अगर यंगस्टर की बात करें तो ?
तो मैं कहना चाहूंगी कि अगर यगंस्टर की भक्तिभावना देखनी हो तो इस्कॉन मंदिर,सिद्धी विनायक मंदिर,महालक्ष्मी मंदिर या फिर साई बाबा के दर्शनों हेत् शिर्डी जाकर देखिये । आपको स्वंय पता लग जायेगा कि यंगस्टर्स आज ईश्वर को हमसे ज्यादा मानता है ।

- आप प्रचार से हमेशा दूर रहती हैं?
देखिये, मैं कोई कोई लता मंगेशकर या आशा भोंसलें तो हूं नहीं,और ना ही मैं बहुत बडी सिंगर हूं । फिर भी आप लोगों का प्यार देखकर आप लोगों से हमेशा जुडी रही हूं । बस मेरे लिये इतना ही काफी है ।

- एक भजन सिंगर में क्या क्या विशेषतायें होनी चाहिये ?
कोई जरूरी नहीं कि एक भजन सिंगर बहुत ज्यादा सुरीला या गायन का महारथी ही हो । भजन गायन भक्ति और श्रद्धा से जुडा हुआ है । इसलिये भक्ति गायन ऐसी आस्था से जुडा होना चाहिये जिसे सुनकर कोई भी भावविभोर हो भक्ति में लीन हो जाये । आपको एक उदाहरण देती हूं । एक बार मेरा कार्यक्रम चौपसटी पर हो रहा था,तभी बीच में एक बूढा भिखारी मेरे पास मुच पर आया और उसने अपने भीख के कटोरे में से पांच रूपये निकाल कर मेरे हाथ पर रखे और फिर नमन कर चलता बना । बाद में कितनी ही देर तक मैं उन पांच रूपयो को देखती रही, फिर मैने सोचा कि ये शायद मेरे लिये भगवान का दिया हुआ परसाद था,लिहाजा मैने आज भी मैने वो पांच का नोट संभाल कर रखा हुआ है ।

- आफ अभी तक कितने एलबम रिलीज हो चुके हैं ?
वैसे तो मैने ज्यादातर लाइव ही गाया है । फिर भी अभी तक तीस एलबम तो रिलीज हो ही चुके हैं । और अब ये बजरंग बाण वीडियो एलबम बाजार में है ।

Dainik Ibadat 3 August 2026